माँ अन्नपूर्णा स्मृति स्थल, सराया गुलबराय, नगरा, जिला बलिया, उत्तरप्रदेश (भारत) 221711

सिद्धपीठ हथियाराम मठ में पारंपरिक रूप से किया गया अर्चन-पूजन

गाजीपुर । सिद्धपीठ हथियाराम मठ में पारंपरिक रूप से शक्ति पूजन, शस्त्र पूजन, शास्त्र पूजन, ध्वज पूजन, शिव पूजन और शमी पूजन किया गया। इस अवसर पर सत्संग सभा में सिद्धपीठ के 26वें पीठाधिपति एवं जूना अखाड़ा के महामंडलेश्वर भवानी नंदन यति महाराज ने कहा कि लगभग 900 वर्ष पुराना यह मठ सिद्ध संत महात्माओं की तपोस्थली रहा है। उन्होंने जोर दिया कि भारत वासना का नहीं, बल्कि साधना का देश है।महामंडलेश्वर ने कहा कि विदेशों में विज्ञान के साथ वासना भी है, लेकिन यदि इसे उपासना से जोड़ा जाए तो वासना नहीं होगी। भारत में ऋषियों के चिंतन के साथ चरित्र की शिक्षा दी जाती है। उन्होंने बताया कि भारत विश्व गुरु रहा है और इसका मूल मंत्र पूजा-पाठ, उपासना तथा साधना रही है, जिसका प्रमाण स्वामी विवेकानंद द्वारा विश्व मंच पर भारत के ज्ञान-विज्ञान का झंडा उठाना है। सिद्धार्थनगर विश्वविद्यालय की कुलपति कविता साहू ने कहा कि हमारा देश गुरु प्रधान रहा है। उन्होंने संस्कारों के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि संस्कार माता से सीखते हैं और नवरात्रि में मां की साधना होती है। जिससे संस्कार घर से ही शुरू होते हैं। उन्होंने धैर्य रखने की आवश्यकता पर बल दिया और यज्ञ से पर्यावरण के स्वस्थ होने की बात भी कही। जिला न्यायाधीश धर्मेंद्र कुमार पांडेय ने जिले में सात हजार से अधिक वैवाहिक विवाद के मामलों पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने इसका मूल कारण संस्कारों की कमी बताया और कहा कि ऐसे सिद्धपीठों तथा संत महात्माओं के सानिध्य में ही सही संस्कार प्राप्त होते हैं। इस अवसर पर कन्या पीजी कॉलेज के प्राचार्य डॉ. रत्नाकर त्रिपाठी, देवराहा बाबा, एडवोकेट धर्म प्रकाश दुबे, जंगीपुर विधायक वीरेंद्र यादव, डॉ. अमिता दुबे, सुभाष सिंह बलिया, के.डी. सिंह, विजेंद्र सिंह, संत अभयानंद यति, मुख्य यजमान विपिन सिंह मीरपुर, काशी से पधारे आचार्य पंडित सुरेश पांडे और संजय पांडेय सहित कई गणमान्य व्यक्ति तथा श्रद्धालु उपस्थित थे। कार्यक्रम के अंत में महामंडलेश्वर ने बुढ़िया माता को भोग लगाया और प्रसाद वितरित किया।

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *